हर मूवी से पहले धूम्रपान की चेतावनी दी जाती है। इसका एडिक्शन बहुत बुरा होता है। ज्यादातर धुम्रपान की लत तब लगती है जब व्यक्ति उदास होता है या फिर नकारात्मक भावनाएं उत्पन्न होती हैं। इस बात की जानकारी एक रिसर्च में सामने आई है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स की एक टीम ने बताया है कि अन्य नकारात्मक भावनाओं की तुलना में उदासी स्मोकिंग एडिक्शन को ट्रिगर करने का एक विशेष कारण है।
रिसर्चर्स ने बताया है कि उदासी और नकारात्मक भावनाएं रखने वाले लोगों में धूम्रपान करने की दूसरों की तुलना में ज्यादा संभावना होती है। यही वजहें होती हैं कि लोग शराब और स्मोकिंग की तरफ प्रेरित होते हैं।
तो ये है दुख और चेन स्मोकिंग में संबंध:
प्रमुख रिसर्चर चार्ल्स ए. डोरिसन ने कहा कि किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावना चाहें वो क्रोध हो या घृणा, तनाव हो या उदासी, इस तरह की स्थितियां ही व्यक्ति को नशे का उपयोग करने की तरफ आकर्षित होता है। डोरिसन ने प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित इस रिसर्च में कहा गया है कि उदासी नशे की लत के उपयोग का एक विशेष रूप है। इससे ही चेन स्मोकिंग ट्रिगर होती है।
इस तरह की गई रिसर्च:
सबसे पहले रिसर्चर्स ने एक राष्ट्रीय सर्वे के आंकड़ों की जांच की। इसमें 20 वर्ष के 10,685 लोगों को देखा गया। प्रतिभागियों के बीच दुख धूम्रपान करने वाले के साथ साझा है।
दूसरे में यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या उदासी की वजह से लोग धूम्रपान करते हैं या नकारात्मक जीवन की घटनाएं उदासी और धूम्रपान दोनों का कारण बनती हैं। इसके लिए 425 ऐसे लोगों पर टेस्ट किया गया है जो स्मोक करते हैं।
तीसरे का तरीका दूसरे की तरह है। इसमें 700 लोगों ने वीडियो देखा और जीवन के अनुभवों के बारे में लिखा। इनमें से कुछ उदास थे तो कुछ तटस्थ।
आखिरी में 158 धूम्रपान करने वालों लोगों को शामिल किया गया। इसमें पता चला कि उदासी ने वास्तविक धूम्रपान व्यवहार को कैसे प्रभावित किया। इसमें लोगों को न्यूनतम 8 घंटे धूम्रपान से दूर रहना पड़ा।
इस रिसर्च का निष्कर्ष यह आया कि जब भी व्यक्ति उदास होता है तो उसे स्मोकिंग ये निकला कि जब इंसाकी क्रेविंग होती है। साथ ही यह भी सामने आया कि नॉर्मल ग्रुप में शामिल लोगों की तुलना में उदासी समूह के लोग जल्द ही धूम्रपान करने के लिए अधिक अधीर दिखे।